खैरागढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अनुसूचित जाति पोस्ट मैट्रिक बालिका छात्रावास खैरागढ़ में विशेष कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के अध्यक्ष विजय कुमार होता के निर्देश एवं तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में छात्रावास की बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकार, संवैधानिक संरक्षण और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई. कार्यक्रम में तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ की अध्यक्ष मोहनी कंवर ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों एवं संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि पात्र लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता एवं कानूनी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। जरूरतमंद व्यक्ति तालुक विधिक सेवा समिति के माध्यम से इसका लाभ ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों और संरक्षण के लिए विधिक सेवा संस्थाओं द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय के विरुद्ध कानूनी रास्ते की जानकारी देना है।
संविधान में मिले हैं विशेष अधिकार
शिविर में बालिकाओं को संविधान के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।
अनुच्छेद 15 के तहत भेदभाव का निषेध, अनुच्छेद 16 के तहत रोजगार में समान अवसर, अनुच्छेद 46 के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजातियों सहित कमजोर वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों के संरक्षण तथा अनुच्छेद 335 के तहत सेवाओं एवं पदों में उनके दावों से जुड़े प्रावधानों को समझाया गया। साथ ही अनुच्छेद 338-A के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका की जानकारी दी गई।
POCSO से लेकर साइबर अपराध तक जागरूक हुईं छात्राएं
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा खलखो ने बालिकाओं को POCSO एक्ट, साइबर अपराध, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार, किशोर न्याय अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को साइबर ठगी, ऑनलाइन अपराध, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही श्रम एवं समाज कल्याण विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा कैरियर गाइडेंस के संबंध में भी उपयोगी जानकारी दी गई।
बाल विवाह और बालश्रम के खिलाफ भी दी जानकारी
पैरालीगल वॉलंटियर गोलू दास साहू ने महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, वरिष्ठ माता-पिता एवं वृद्धजनों के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, बालश्रम सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया। इसके अलावा न्याय आपके द्वार, राष्ट्रीय लोक अदालत, मध्यस्थता (मीडिएशन) तथा सालसा और नालसा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
बालिकाओं को संदेश—अधिकार जानें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं
शिविर के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी ही शोषण और अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत है। किसी भी प्रकार की हिंसा, बाल विवाह, बालश्रम, साइबर अपराध, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा अथवा अधिकारों के हनन की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित कानूनी सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
कार्यक्रम में छात्रावास वार्डन एस. पाटिल, कल्याणी वर्मा सहित बड़ी संख्या में बालिकाएं उपस्थित रहीं। शिविर ने छात्राओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें कानून के माध्यम से न्याय प्राप्त करने का भरोसा भी दिया।

