खैरागढ़ - शहीद नगरी छुईखदान के केकतीबाड़ी में रविवार, 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय भव्य आयोजन हुआ। लगातार बारिश के बावजूद आदिवासी समाज के लोगों का जोश और उत्साह देखते ही बना। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी मूलनिवासी कार्यक्रम स्थल पहुंचे और अपनी एकता, संस्कृति, परंपरा एवं अधिकारों की बुलंद आवाज को मजबूती से सामने रखा। बारिश की तेज फुहारों के बीच भी कार्यक्रम स्थल पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। न मौसम की परवाह, न बारिश की बाधा-आदिवासी मूलनिवासियों की एकजुटता ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
जल-जंगल-जमीन और मूल अधिकारों की आवाज
विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी मूलनिवासियों के अधिकार, सम्मान, अस्तित्व, संस्कृति और संवैधानिक संरक्षण को लेकर जागरूकता का महत्वपूर्ण दिन है। छुईखदान में आयोजित कार्यक्रम में समाज की एकजुटता के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक अधिकार, सांस्कृतिक संरक्षण तथा जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल उसकी परंपराओं और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़ा उसका सदियों पुराना रिश्ता उसकी मूल पहचान है। विकास की दौड़ में आदिवासी समाज की भाषा, बोली, संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है।

गोंड से बैगा तक, एक मंच पर दिखी आदिवासी एकता
जिला स्तरीय आयोजन में गोंड, कंवर, कंडरा, परधान, बैगा, उरांव सहित विभिन्न अनुसूचित जनजाति समाजों की सक्रिय सहभागिता रही। विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, समाज प्रमुख, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी संगठनों के सदस्य और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं युवा कार्यक्रम में शामिल हुए। विभिन्न आदिवासी समुदायों की सामूहिक मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि अलग-अलग समाज और परंपराएं होने के बावजूद आदिवासी मूलनिवासियों की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत एक मजबूत साझा पहचान है।
नई पीढ़ी को शिक्षा और अधिकारों से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक मजबूती शिक्षा, जागरूकता और संगठन से आएगी। नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसे अपनी जड़ों, भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। साथ ही संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी समाज के हितों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया गया।

बारिश के बीच भी कायम रहा जोश
कार्यक्रम के दौरान तेज बारिश ने आयोजन में व्यवधान जरूर डाला, लेकिन आदिवासी मूलनिवासियों का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। लोग बारिश के बीच कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। पारंपरिक पहचान, सामाजिक एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का यह नजारा पूरे आयोजन में आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजकों ने कहा कि छुईखदान का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकजुटता, स्वाभिमान और अपनी पहचान को संरक्षित रखने के संकल्प का प्रतीक है।

एकता, शिक्षा और संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर समाज के लोगों ने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने तथा अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का संकल्प लिया।

