छुईखदान।अंकित महोबिया - छुईखदान स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शाखा की अव्यवस्थित कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की कमी के कारण क्षेत्र के ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे-छोटे बैंकिंग कार्यों के लिए भी लोगों को कई-कई दिनों तक बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे ग्राहकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार छुईखदान निवासी एवं सेवानिवृत्त शिक्षक ईश्वर दास कोशरे के खाते से आधार के माध्यम से पैसे नहीं निकल पा रहे हैं। इस समस्या को लेकर वे कई बार बैंक पहुंचे, लेकिन बैंक प्रबंधन द्वारा उन्हें बार-बार बस स्टैंड स्थित छोटी शाखा में जाने की बात कहकर लौटा दिया गया। बताया जा रहा है कि लगभग दो महीनों से उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसी तरह रोशन चंद्राकर को अपने खाते का स्टेटमेंट प्राप्त करने के लिए करीब एक सप्ताह तक बैंक के चक्कर लगाने पड़े। कई बार बैंक जाने के बाद कहीं जाकर उन्हें स्टेटमेंट मिल पाया। वहीं प्रेम श्रीवास द्वारा अपने खाते में पैसा जमा करने के बाद भी दो दिनों तक राशि खाते में प्रदर्शित नहीं हुई। इस समस्या के समाधान के लिए उन्हें भी तीन-चार दिनों तक बैंक आना पड़ा, तब जाकर उनकी समस्या का निराकरण हो सका। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक में कई बार कर्मचारियों द्वारा बीमा योजनाएं लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। कुछ मामलों में ग्राहकों की जानकारी या सहमति के बिना ही उनके खातों से बीमा योजनाएं जोड़ दी जाती हैं। जब ग्राहकों को इसकी जानकारी मिलती है, तब उन्हें बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस स्थिति से खासकर ग्रामीण और बुजुर्ग ग्राहक अधिक प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छुईखदान ब्लॉक में लगभग 107 पंचायतें हैं और स्वयं छुईखदान एक नगर पंचायत है। क्षेत्र की बड़ी आबादी—जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी और पेंशनधारी शामिल हैं—अपनी बैंकिंग जरूरतों के लिए इसी शाखा पर निर्भर है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में ग्राहकों की सेवा के लिए शाखा में मात्र तीन कर्मचारियों के भरोसे कामकाज चल रहा है, जिससे कार्यों की गति काफी धीमी हो गई है। ग्राहकों का आरोप है कि कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ कुछ कर्मचारियों का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं है। कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी लोगों का काम नहीं हो पाता और उन्हें अगले दिन फिर से बैंक आना पड़ता है। इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है, क्योंकि बैंक से क्षेत्र के हजारों लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो लोगों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। ग्राहकों ने बैंक प्रबंधन तथा उच्च अधिकारियों से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने, ग्राहकों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित करने और बैंकिंग सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की मांग की है ताकि क्षेत्र के लोगों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।
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