छुईखदान। अंकित महोबिया - छुईखदान स्थित कृषि महाविद्यालय परिसर में संचालित पान अनुसंधान केंद्र की विभिन्न योजनाओं को लेकर क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। किसानों का आरोप है कि पान उत्पादन को बढ़ावा देने और आय वृद्धि के उद्देश्य से कई योजनाएं संचालित किए जाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन इनकी जानकारी अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि पान उत्पादन, पौध वितरण, प्रशिक्षण एवं प्रसंस्करण से संबंधित गतिविधियां लंबे समय से संचालित होने की बात कही जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के बड़ी संख्या में किसानों को इन योजनाओं की स्पष्ट जानकारी नहीं है। कुछ किसानों ने आरोप लगाया है कि योजनाओं का लाभ केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित है। कई किसानों का कहना है कि न तो उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सूचना दी गई और न ही पान पौध वितरण योजना के बारे में कोई जानकारी मिली। उनका कहना है कि यदि योजनाएं संचालित हो रही हैं तो उनकी सूचना ग्राम स्तर पर सार्वजनिक रूप से चस्पा की जानी चाहिए। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि प्रशिक्षण और सामग्री वितरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन इनकी व्यापक सूचना नहीं दी गई। कई किसानों ने दावा किया कि उन्हें इन कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर नहीं मिला। जट, लाभार्थियों की सूची और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजनाओं का लाभ किन-किन किसानों को मिल रहा है। और तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाए। किसानों का कहना है कि यदि योजनाओं की सही और समयबद्ध जानकारी दी जाए तो अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकते हैं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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