छुईखदान अंकित महोबिया - अधिवक्ता संघ छुईखदान ने उप कोषालयों से न्याय शुल्क स्टाम्प एवं न्याय शुल्क टिकट के विक्रय को बंद करने के राज्य शासन के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। संघ ने इस संबंध में माननीय राज्यपाल, छत्तीसगढ़ को पत्र प्रेषित कर निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। संघ द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि संचालनालय कोष एवं लेखा, छत्तीसगढ़ द्वारा 11 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिला कोषालयों के माध्यम से स्टाम्प विक्रय व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप तहसील स्तर पर न्याय शुल्क स्टाम्प एवं न्याय शुल्क टिकट की उपलब्धता समाप्त कर दी गई है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि इस निर्णय से तहसील स्तर पर कार्यरत अर्जीनवीशों, अधिवक्ताओं एवं आम नागरिकों को स्टाम्प और न्याय शुल्क टिकट के लिए जिला मुख्यालय पर निर्भर होना पड़ेगा। इससे न केवल वादकारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, बल्कि समय की भी अनावश्यक हानि होगी। संघ के अनुसार, इससे अधिवक्ताओं के दैनिक कार्य प्रभावित होंगे और न्यायिक प्रक्रिया में भी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि शासन द्वारा उक्त निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो अधिवक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान हेतु आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए विवश होना पड़ सकता है। अधिवक्ता संघ छुईखदान ने शासन से मांग की है कि आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेते हुए तहसील स्तर पर स्टाम्प, न्याय शुल्क स्टाम्प एवं न्याय शुल्क टिकट की पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि आम जनता और अधिवक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उक्त पत्र की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़, राजस्व मंत्री तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को भी प्रेषित की गई है। पत्र पर दिनांक 25 फरवरी 2026 अंकित है और इसे अधिवक्ता संघ छुईखदान एवं समस्त अधिवक्ताओं की ओर से भेजा गया है।
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