खैरागढ़। कबीरधाम मे नपा सीएमओ रहते गरीब बस्तियों मे रहने बसने वालो की सेहत से खिलवाड़ करने वाले नरेश वर्मा के सस्पेंशन बाद आखिरकार विभाग ने कवर्धा सीएमओ को उनके खिलाफ थाने मे एफआईआर कराने का आदेश जारी किया है। लंबी जॉच प्रक्रिया, वसूली नोटिस के बाद आखिरकार विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए पहले उन्हे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर जेडी आफिस दुर्ग अटैच किया और उसके बाद 24 फरवरी को एफआईआर दर्ज कराने कवर्धा सीएमओ को निर्देशित किया है। जानकरी अनुसार सूडा ने जून 25 मे कवर्धा सीएमओ के रूप मे काम करने के दौरान सीएमओ नरेश वर्मा को सीएम शहरी स्लम योजना तहत दवा खरीदी, वितरण और भुगतान प्रक्रिया मे वित्तीय हानि के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पाते हुए 20 लाख 80 हजार 380 रूपयो की वेतन से वसूली का पत्र जारी किया था जिसके बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन व विकास विभाग ने सूडा से मिले दस्तावेजो की विशेषज्ञ टीम से जॉच कराई जिन्होने दिसंबर 25 को अवर सचिव को प्रेषित अभिमत मे लिखा है कि कार्य संचालन सेवा प्रदाता कंपनी पर अर्थदंड की राशि अधिरोपित नही करने से 25 लाख 91 हजार 500 रूपयो की हानि दर्शित है जबकि कबीरधाम जिला अरबन पब्लिक सर्विस सोसायटी द्वारा 10 जनवरी 22 को जारी पत्र अनुसार पेनाल्टी काटा जाना था। जॉच समिति ने पाया कि कबीरधाम के तत्कालीन सीएमओ नरेश वर्मा ने एमएमयू संचालन एजेंसी को अधिक राशि का भुगतान किया है इसलिए उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कारवाई के अलावा अधिक राशि भुगतान को लेकर एफआईआर कराया जाना चाहिए। विभाग ने जॉच समिति के प्रस्ताव को नियमानुसार वाजिब मानते हुए तत्काल प्रभाव से पहले निलंबित किया और अब एफआईआर का आदेश जारी किया है।
वसूली के लिए 6 महीने पहले सूडा ने किया था पत्र जारी
कवर्धा नगर पालिका मे सीएमओ के रूप मे कार्य करने के दौरान नरेश वर्मा पर सीएम स्लम स्वास्थ्य योजना के नोडल अधिकारी होते हुए स्लम स्वास्थ्य योजना जैसे जनहितकारी प्रोजेक्ट के क्रियांवयन दौरान पीएमयू द्वारा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर दवा खरीदी, वितरण और भुगतान मे पारदर्शिता के अभाव मे 2 लाख 13 हजार 497 रूपयो का अपव्यय, थर्ड पार्टी आडिट एजेंसी व एरिया मैनेजर द्वारा एमएमयू संचालन एजेंसी पर 17 लाख 7 हजार 880 रूपए और 6 लाख 500 रूपए कुल 23 लाख 8 हजार 380 रूपयो की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई थी जिसमे से मात्र 2 लाख 28 हजार रूपए अधिरोपित करना पाया गया जबकि शेष राशि लगभग 23 लाख जॉच के दौरान अधिरोपित करना नही पाया गया। राज्य शहरी विकास अभिकरण ने योजना क्रियांवयन मे पारदर्शिता का अभाव, वित्तीय अनियमितता को सेवा शर्तो के अधीन कदाचरण की श्रेणी और दायित्व निर्वहन मे लापरवाही साथ उदासीनता का परिचायक मानते हुए उक्त कृत्य को करने का कारण स्पष्ट करने कहा वही प्राधिकरण द्वारा जारी पत्र मे स्पष्ट रूप से कहा गया कि समय सीमा के भीतर प्रस्तुत जवाब समाधानकारक नही पाए जाने की स्थिति मे पर वित्तीय हानि की वसूली सीएमओ नरेश वर्मा के वेतन अथवा राजस्व वसूली नियमो के प्रावधान तहत किया जाएगा। जांच रिपोर्ट मुताबिक अफसरशाही के इस खेल से सरकारी खजाने को तगड़ा झटका लगा और यह साफ तौर पर वित्तीय अनियमितता और कदाचार की श्रेणी में आता है।
पूर्व जिला भाजपा महामंत्री ने उठाई आवाज
मामले का पूर्व जिला भाजपा महामंत्री रामाधार रजक ने ख्ुालासा किया था उन्होने प्रकरण संज्ञान मे आने के बाद विभागीय अधिकारियो व सरकार के मुखिया तक इस गड़बड़झाले की जानकारी दी जिसके बाद पहले सूडा एक्शन मे आया। नरेश वर्मा के खिलाफ बीस लाख से उपर की राशि वसूली का पत्र जारी किया बाद मे नगरीय प्रशासन विभाग ने भी मामले की सूडा के विशेषज्ञो से जॉच कराई जिसमे उन्होने स्पष्ट रूप से नरेश वर्मा को वित्तीय हानि का दोषी पाते हुए कठोर अनुशासनात्मक कारवाई के अलावा एफआईआर कराया जाना सही बताया था। रामाधार रजक ने बताया कि सीएम के जनकल्याणकारी योजना के क्रियांवयन सरकारी अधिकारी की लापरवाही की जानकारी मिलने के बाद उन्होने प्रशासनिक अधिकारियो सहित सरकार से लगातार पत्र व्यवहार किया, मुलाकात की जिसके बाद अब सरकारी राशि का अनुचित उपयोग करने वाले के खिलाफ सस्पेंंशन बाद एफआईआर की कारवाई की गई है।

