खैरागढ़ - इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पान अनुसंधान केंद्र, छुईखदान का निरीक्षण कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत खैरागढ़ प्रेम कुमार पटेल द्वारा किया गया। जिला प्रशासन के सहयोग से पान अनुसंधान केंद्र परिसर स्थित कृषि महाविद्यालय, रामपुर (नवागांव) फार्म में टमाटर प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जा रही है। भवन निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा मशीनरी एवं अन्य आवश्यक सामग्री की शीघ्र खरीदी कर इकाई प्रारंभ करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए। उन्होंने इस कार्य हेतु आवश्यक वित्तीय सहयोग का आश्वासन भी प्रदान किया। इस प्रसंस्करण इकाई के माध्यम से क्षेत्र की महिला स्व-सहायता समूहों को टमाटर पल्प, टमाटर सॉस एवं अन्य उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। निरीक्षण के दौरान महिला समूहों से चर्चा कर कलेक्टर ने ऑनलाइन मार्केटिंग से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। साथ ही राजनांदगांव स्थित एबीआईएस (ABIS) फैक्ट्री से टाई-अप कर विपणन संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। उल्लेखनीय है कि जिले में टमाटर का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है, किंतु बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसी समस्या के समाधान हेतु मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत कलेक्टर के मार्गदर्शन में टमाटर प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है। निरीक्षण के दौरान पान परियोजना की भी समीक्षा की गई। जिले में पान की खेती को पुनर्जीवित करने एवं किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से 60,000 से अधिक बंगला एवं देसी पान की किस्में (मध्यप्रदेश के महाराजपुर एवं पानागर से लाकर) किसानों को वितरित की गई हैं। इसके साथ ही फफूंदनाशक, ग्रीन शेडनेट एवं बांस जैसी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के सहयोग से 5 किसानों के यहां 250 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस का निर्माण किया गया है, जहां पान के पौधों का रोपण किया जाएगा। वीरूटोला एवं कुरमुड़ा स्थित दो उद्यानिकी नर्सरियों में पान का बरेजा तैयार किया जा रहा है तथा पान अनुसंधान केंद्र में भी बरेजा स्थापित कर पौध उत्पादन किया जा रहा है। कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत ने पान उत्पादकों से चर्चा कर उन्हें उत्पादन एवं विपणन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पान उत्पादों को राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर एवं छुईखदान बाजार से जोड़कर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा छुईखदान में लघु आउटलेट प्रारंभ करने के लिए मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर कलेक्टर ने पान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. बी. एस. असाटी, डॉ. दीपिका देवदास एवं कृषि महाविद्यालय छुईखदान के अधिष्ठाता डॉ. ए. के. गुप्ता को क्षेत्र में पान की खेती को बढ़ावा देने हेतु किए जा रहे प्रयासों के लिए सराहना की।
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