खैरागढ़। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव का शुभारंभ माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने की। महोत्सव के प्रथम दिन हिंदी नाट्य साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित कालजयी नाटक ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह नाटक एक मूर्ख एवं अव्यवस्थित शासन व्यवस्था के कारण राज्य (अंधेर नगरी) में व्याप्त अराजकता और अन्याय को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। नाटक में ‘टके सेर भाजी, टके सेर खाजा’ जैसी स्थितियों के माध्यम से भ्रष्ट शासन प्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है। गुरु-शिष्य की कथा के माध्यम से अंत में मूर्ख राजा को उसके कर्मों का फल मिलता है। इस नाटक की प्रस्तुति बीपीएस प्रथम वर्ष के उन विद्यार्थियों द्वारा दी गई, जिनका माइनर विषय थियेटर है। इसके पश्चात द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकनाट्य शैली ‘नाचा’ की प्रस्तुति दी गई। इस नाट्य प्रस्तुति में ग्रामीण जीवन के यथार्थ को दर्शाते हुए समाज में फैली नशाखोरी के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला गया तथा नशा मुक्ति का संदेश दिया गया। उक्त दोनों प्रस्तुतियों का निर्देशन थियेटर विभाग के अतिथि व्याख्याता डॉ. शिशु कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने सभी कलाकारों के उत्साह और अभिनय की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास एवं सृजनशीलता के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने दर्शकों से नाट्य कला का आनंद लेने का आह्वान किया।इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. मानस साहू, सहायक प्राध्यापक डॉ. कौस्तुभ रंजन सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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