खैरागढ़ - संगीत एवं कला की नगरी खैरागढ़ की निवासी शाला संडी की प्रधान पाठक एवं साहित्यकार डॉ॰ पद्मा साहू पर्वणी को श्रीमती अनार देवी शर्मा स्मृति स्वतंत्रता सेनानी पंडित गया प्रसाद लोकनिधि अलंकरण 2025 से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ी लोकसाहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रज्ञा हिन्दी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट, फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) द्वारा 15 फरवरी को आयोजित सप्तम अंतर्राष्ट्रीय प्रज्ञा सम्मान समारोह में प्रदान किया गया। समारोह आईवी इंटरनेशनल स्कूल, फिरोजाबाद के सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रघुवीर शर्मा (उपनिदेशक, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार) थे तथा अध्यक्षता पद्मश्री प्रो. डॉ. कमलाकर त्रिपाठी (मेडिकल विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी) ने की। विशिष्ट अतिथियों में नगर विधायक मनीष असीजा, साहित्यकार डॉ. राम सनेहीलाल शर्मा ‘यायावर’, कृष्ण कुमार कनक, यशपाल यश, मुकुल पाराशर, अभिषेक मित्तल, मुकेश मणिकंचन सहित देशभर से आए अनेक साहित्यकार एवं विद्वान उपस्थित रहे। समारोह के दौरान डॉ॰ पद्मा साहू पर्वणी ने ‘अभिव्यक्ति’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी बोली में अपना परिचय एवं सुमधुर कविता पाठ प्रस्तुत कर उत्तर प्रदेश की धरती पर छत्तीसगढ़ की भाषा-बोली का गौरव बढ़ाया। उनकी प्रस्तुति को देश-विदेश से आए साहित्यप्रेमियों ने सराहा तथा मातृभाषा के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ॰ पद्मा साहू पर्वणी वरिष्ठ अधिवक्ता घम्मन साहू की धर्मपत्नी हैं। उनकी इस उपलब्धि पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ पी.सी. लाल यादव, जिला उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, डॉ. इंद्राणी साहू ‘सांची’, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, महेंद्र बघेल, डॉ. सियाराम साहू, दुजराम साहू, कोमल गुरु, नीरामनी श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य दिनेश वर्मा, पत्रकार आहियानियाजी, व्याख्याता मोनिका सिंह, शिक्षिका उत्तरा साहू, कोमल कोठारी, विनीता राजपूत, सुनीता सिंह, शिव प्रसाद, मोनिका सोनवाने सहित परिवारजनों, साहित्यकारों एवं शिक्षक समुदाय ने बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम में कर्नाटक से प्रो. डॉ. मंजूनाथ अबींग, कुवैत से संगीता पंखुड़ी, पर्वतारोही एवं एथलीट कुमारी पूनम बघेल, शैलेन्द्र असीम, कविता प्रसाद (लखनऊ), लतिका चावड़ा, शंकर मौरे (मध्य प्रदेश), ब्रजलता मिश्र (झांसी), अर्चना कोचर (हरियाणा), कृष्णा जैमिनि कल्याणी (झारखंड), राघवेन्द्र सिंह (फिरोजाबाद) सहित देश के विभिन्न राज्यों के साहित्य मनीषियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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