बालोद। सोन कुमार सिन्हा - छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सेन समाज ने सगाई के बाद बढ़ती रिश्ते टूटने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण सामाजिक फैसले लिए हैं। जिला स्तरीय बैठक में तय किया गया कि अब सगाई के बाद विवाह से पहले मंगेतर आपस में मोबाइल फोन पर अकेले में बातचीत नहीं करेंगे। आवश्यकता होने पर बातचीत माता-पिता की उपस्थिति में ही की जाएगी। सेन समाज के जिला अध्यक्ष संतोष कौशिक ने बताया कि पूर्व में इस संबंध में कोई स्पष्ट नियम नहीं था। हाल के समय में सगाई टूटने की घटनाओं की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि मोबाइल पर हुई बातचीत के कारण कई बार विवाद की स्थिति बनी और रिश्ते टूट गए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बैठक में यह भी फैसला किया गया कि अब विवाह के दौरान दुल्हन की बहनें दूल्हे का जूता नहीं छिपाएंगी। समाज के प्रवक्ता उमेश कुमार सेन के अनुसार, इस रस्म के दौरान कई बार दोनों पक्षों में अनावश्यक विवाद की स्थिति बन जाती है, जिससे पारिवारिक संबंध प्रभावित होते हैं। इसके अतिरिक्त यह निर्णय भी लिया गया कि सगाई समारोह में केवल 15 से 20 लोग ही शामिल होंगे, विवाह में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाएगा तथा प्लास्टिक के बर्तनों के स्थान पर पत्तल में भोजन परोसा जाएगा। बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि यदि समाज का कोई व्यक्ति अन्य धर्म अपनाता है तो उसके साथ समाज रोटी-बेटी का संबंध समाप्त कर देगा। सेन समाज के प्रदेश संगठन मंत्री गौरी शंकर श्रीवास ने बताया कि बालोद जिले में लिए गए इन निर्णयों की जानकारी उन्हें है और प्रयास किया जाएगा कि इन्हें पूरे प्रदेश में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सगाई टूटने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इन फैसलों को लेकर समाज के भीतर राय बंटी हुई है। बालोद की 20 वर्षीय साक्षी ने निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मोबाइल फोन के कारण रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं तो इस पर नियंत्रण जरूरी है। वहीं कुछ युवाओं और समाज के सदस्यों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि विवाह पूर्व आपसी संवाद से जीवनसाथी को समझने का अवसर मिलता है, जो सफल वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक है।
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