खैरागढ़। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित शिक्षकों ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), पुणे में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला में सहभागिता की। यह कार्यशाला राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों को आधुनिक विज्ञान एवं गणित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना रहा। दुर्ग संभाग के केसीजी जिले से चयनित व्याख्याताओं में चंद्रेश कुमार जंघेल (हायर सेकेंडरी स्कूल बुंदेली), चंद्रकांत साहू (हायर सेकेंडरी स्कूल उदयपुर), संध्या विश्वकर्मा (हायर सेकेंडरी स्कूल लिमतरा), पायल मेश्राम (हाई स्कूल भरदा कला) एवं नेमीन जंघेल (हायर सेकेंडरी स्कूल मड़ौदा) ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को आईआईएसईआर पुणे के साइंस सेंटर का अवलोकन कराया गया। कल्पक घर में सरल, रोचक एवं कम लागत वाले विज्ञान प्रयोगों की जानकारी दी गई, जिससे प्रभावी शिक्षण-अधिगम सामग्री के निर्माण की समझ विकसित हुई। इसके साथ ही तारामंडल भ्रमण, खगोलीय पिंडों का अवलोकन एवं अनुसंधान केंद्रों की सैर कराई गई, जो शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं रोमांचक अनुभव रहा। वैज्ञानिकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से शिक्षकों को अनुसंधान आधारित सोच विकसित करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण में एक्टिव लर्निंग, एक्टिविटी-बेस्ड टीचिंग एवं स्टूडेंट सेंट्रिक पेडागॉजी जैसी आधुनिक शैक्षणिक अवधारणाओं पर विशेष बल दिया गया। विज्ञान को तथ्यों के संग्रह के बजाय एक सतत प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने की अवधारणा को प्रमुखता से समझाया गया। कार्यशाला में एनजीएसएस-2013 (नेक्स्ट जेनरेशन साइंस स्टैंडर्ड्स) की संकल्पना, उद्देश्य एवं कक्षा स्तर पर उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। गणित शिक्षण में क्षेत्रफल, आयतन, तार्किक चिंतन एवं दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से अवधारणाओं को सरल बनाने की विधियाँ सिखाई गईं। वहीं विज्ञान विषय में ध्वनि, प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, पिच एवं अनुनाद जैसे जटिल विषयों को गतिविधि एवं प्रयोग आधारित तरीकों से समझाया गया। नेचर वॉक के माध्यम से शिक्षकों को पर्यावरण एवं जैव विविधता से जोड़ा गया, जिसमें जीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन, प्रजनन, सुरक्षा, जीवनकाल एवं जनन काल की जानकारी दी गई। साथ ही डिजिटल टूल्स, शैक्षणिक ऐप्स एवं कम लागत वाली शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के निर्माण व उपयोग पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों ने बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, व्यवहारिक एवं छात्र-केंद्रित बनाने की नई दृष्टि प्राप्त हुई है। प्रशिक्षण उपरांत सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में अर्जित ज्ञान का उपयोग कर नवाचारी शिक्षण गतिविधियाँ संचालित करेंगे, जिससे जिले में गणित एवं विज्ञान शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास सुनिश्चित किया
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