खैरागढ़। जिला कांग्रेस कमेटी केसीजी द्वारा हाल ही में जारी नई कार्यकारिणी सूची के बाद संगठन के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूची जारी होते ही जहां एक ओर नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर असंतोष की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर कुछ पदों पर पुनर्नियुक्ति किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई कार्यकर्ता दबे स्वर में नाराजगी जता रहे हैं हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि संगठन के भीतर वर्चस्व की जंग ने कार्यकर्ताओं के उत्साह को प्रभावित किया है। नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं संगठन की मर्यादा से ऊपर जाती नजर आ रही हैं जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी की एकजुटता कमजोर होती दिख रही है। मैं नहीं तो कोई नहीं की स्थिति ने कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है। एक समय जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सक्रियता की मिसाल दी जाती थी लेकिन वर्तमान हालात में वही कार्यकर्ता कश्मकश और मायूसी के दौर से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। संगठन से बड़ा व्यक्ति होने की प्रवृत्ति भी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में दो गुटों के युवा पदाधिकारियों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आई हैं। सूत्रों का कहना है कि विभिन्न कार्यक्रमों में अपने-अपने समर्थकों की भीड़ जुटाकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इन अति महत्वाकांक्षी प्रवृत्तियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो पार्टी का अनुशासन प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष को यदि संतुलित नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति पर पड़ सकता है। इधर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि कुछ ऐसे कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं जिससे क्षेत्रीय विधायक की उपेक्षा की स्थिति बनती नजर आ रही है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में एक नवनियुक्त पदाधिकारी द्वारा ही क्षेत्रीय विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिससे संगठन की किरकिरी हुई थी और मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा था। ऐसे में उसी पदाधिकारी को पुनः अहम जिम्मेदारी दिए जाने से कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि विधायक गुट और संगठन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। वहीं विधायक द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन की बैठक में शामिल न होने की जानकारी साझा करना और 5 अप्रैल को आयोजित बैठक में उनकी अनुपस्थिति ने इस अंदरूनी खींचतान को और हवा दे दी है. कुल मिलाकर केसीजी कांग्रेस में उभरती यह सियासी सरगर्मी आने वाले समय में संगठन की दिशा एकजुटता और चुनावी संभावनाओं पर बड़ा असर डाल सकती है।
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