राजनांदगांव -सोन कुमार सिन्हा - राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खपरीकला इन दिनों श्रद्धा और आस्था के एक अनोखे केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। शांत और प्राकृतिक वातावरण के बीच लगभग 24 डिसमिल दान की भूमि पर निर्माणाधीन यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पौराणिक मान्यताओं और लोकविश्वास का जीवंत उदाहरण भी बनता जा रहा है। मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां स्थापित 8 फीट लंबी लेटी हुई श्री हनुमानजी की प्रतिमा है। इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता तेजी से फैल रही है, जिससे क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्री हनुमानजी को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। रामायण में वर्णित प्रसंग के अनुसार, जब माता सीता ने लंका में उनके पराक्रम को देखकर उन्हें विश्राम करने का आदेश दिया, तब उन्होंने पहली बार विश्राम किया था। इसी प्रेरणा से खपरीकला में हनुमानजी की लेटी हुई प्रतिमा स्थापित की गई है, जो उनके विश्राम काल का प्रतीक मानी जाती है। यह स्वरूप भक्तों को यह संदेश देता है कि जीवन में सेवा और संघर्ष के साथ-साथ विश्राम भी आवश्यक है। मंदिर के सेवक राजनारायण प्रसाद (टाटा नगर निवासी) ने बताया कि उन्हें बजरंगबली ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्न में दिखे स्थान की खोज करते हुए वे छत्तीसगढ़ पहुंचे और अंततः खपरीकला गांव को पहचान लिया। इसे वे ईश्वर की विशेष कृपा मानते हैं। इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, जो अब निरंतर प्रगति पर है। इस पुनीत कार्य में ग्राम के दानदाताओं भूपेंद्र कवर और नारद कवर का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने 24 डिसमिल भूमि दान दी। वहीं जयंती साहू सहित कई श्रद्धालुओं और संस्था से जुड़े लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों—उमाशंकर साहू, गजेंद्र साहू, ओंकार साहू, पीताम्बर साहू, गोकुल यादव, डाबरी साहू, सत्यप्रकाश साहू, रमेश साहू सहित अन्य सहयोगियों ने तन-मन-धन से योगदान दिया। ग्राम सरपंच माधुरी साहू एवं परमानंद साहू का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। हाल ही में यहां भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के साथ-साथ राहगीरों ने भी बड़ी संख्या में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। भविष्य में यह स्थल “श्री बालाजी धाम” के रूप में प्रसिद्ध होने की दिशा में अग्रसर है। यहां की शांति, आस्था और पौराणिक प्रेरणा इसे एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बना सकती है। खपरीकला का यह मंदिर श्रद्धा, विश्वास और परंपराओं का संगम बनकर उभर रहा है, जहां हर श्रद्धालु आत्मिक शांति और नई आशा का अनुभव करता है।
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