सोन कुमार सिन्हा - डोंगरगढ़ : जिले के सिमगा विकासखंड स्थित दामाखेड़ा अब अपने नए और आधिकारिक नाम से जाना जाएगा. राज्य शासन द्वारा राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित किए जाने के साथ ही दामाखेड़ा का नाम विधिवत रूप से "कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा" कर दिया गया है. इस निर्णय के साथ ही कबीर पंथियों की आस्था के इस प्रमुख केंद्र को वह पहचान मिली है, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी. यह फैसला केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दामाखेड़ा की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. शासन की अधिसूचना जारी होते ही क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल है. दामाखेड़ा लंबे समय से कबीर पंथियों का प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा है. यहां हर वर्ष माघ पूर्णिमा के अवसर पर विशाल संत समागम समारोह और माघी मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. कबीर पंथ से जुड़े संत, महंत और अनुयायी लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि दामाखेड़ा की पहचान को कबीर धर्म से जोड़ा जाए, ताकि इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सके. अब शासन के इस निर्णय से उनकी यह मांग पूरी हो गई है. कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा नाम से यह स्थान न केवल धार्मिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नया आयाम मिलेगा. 23 फरवरी 2024 को दामाखेड़ा में आयोजित संत समागम समारोह माघी मेले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए थे. इस अवसर पर बड़ी संख्या में कबीर पंथी संत, अनुयायी और श्रद्धालु उपस्थित थे. उसी मंच से मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा किए जाने की घोषणा की. उस समय यह घोषणा धार्मिक समाज के लिए एक बड़ी सौगात मानी गई थी. इसके बाद शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया शुरू हुई. घोषणा के बाद जून माह में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदन दिया गया. मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद विधिक प्रक्रिया पूरी की गई और अंततः राज्य शासन द्वारा राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन कर दिया गया. अधिसूचना जारी होते ही यह नाम परिवर्तन कानूनी और प्रशासनिक रूप से प्रभावी हो गया है. अब शासकीय दस्तावेजों, मानचित्रों, अभिलेखों और पत्राचार में यह स्थान कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा के नाम से दर्ज होगा. कबीर पंथ भारतीय संत परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. संत कबीर के विचार, उनके दोहे और सामाजिक समरसता का संदेश आज भी समाज को दिशा देते है. दामाखेड़ा इस परंपरा का जीवंत केंद्र माना जाता है, जहां कबीर पंथ की परंपराएं, रीति-रिवाज और आध्यात्मिक गतिविधियां लगातार संचालित होती है. हर साल आयोजित होने वाला माघी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का भी प्रतीक है। इसमें विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं. ऐसे में दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा होना इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा. नाम बदले जाने के साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा के विकास को नई गति मिलेगी. धार्मिक पर्यटन के रूप में यह स्थान पहले से ही महत्वपूर्ण है, लेकिन अब आधिकारिक पहचान मिलने के बाद यहां आधारभूत सुविधाओं, सड़क, आवास, पेयजल, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के विकास की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी. स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी. माघी मेले के दौरान स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को पहले से ही लाभ मिलता रहा है, जो भविष्य में और बढ़ सकता है. राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की खबर मिलते ही कबीर पंथ से जुड़े संत समाज और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई. कई संतों और सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए शासन का आभार जताया है. उनका कहना है कि यह निर्णय संत कबीर के विचारों और कबीर पंथ की परंपरा को सम्मान देने वाला है. इससे आने वाली पीढ़ियों को भी इस स्थान के महत्व को समझने में आसानी होगी.
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