खैरागढ़। अंकित महोबिया - जिले के जल संसाधन संभाग छुईखदान में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। विभाग के सेवानिवृत्त क्लर्क शिव कुमार उपाध्याय द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत के बाद पूरे प्रकरण की परतें खुलने लगी हैं और कई अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 27 फरवरी को अवर सचिव मुकेश कुमार गोड़ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर आवेदक को अवगत कराया जाए तथा पूरी जानकारी जनदर्शन पोर्टल पर दर्ज की जाए।शिकायतकर्ता ने 25 फरवरी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच संभाग को प्राप्त लगभग 500 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से राशि का दुरुपयोग किया गया और कई कार्य केवल कागजों में पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। शिकायत में कार्यपालन अभियंता बी.के. मरकाम, सहायक अभियंता केतन किशोर साहू, अविनाश नायक, सहायक वर्ग-3 करूणेश मेश्राम सहित अन्य कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। साथ ही सहायक मानचित्रकार कमल नारायण ठाकुर, स्थल सहायक लोकेश शर्मा और अजय चन्द्राकर पर भी नियमों के विरुद्ध कार्य करने के आरोप लगाए गए हैं। गंभीर आरोपों में यह भी कहा गया है कि वार्षिक मरम्मत एवं संधारण के लिए प्राप्त लगभग 4 करोड़ रुपये का जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। राशि के आपसी बंटवारे, फर्जी बिल, ड्राइंग-डिजाइन के नाम पर भुगतान और निविदा प्रक्रिया में कथित मिलीभगत जैसे आरोप भी सामने आए हैं। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी और मानकों के विपरीत कार्य कराने की बात भी शिकायत में दर्ज है। इसके अतिरिक्त कार्यपालन अभियंता पर सरकारी वाहन के दुरुपयोग, लॉगबुक में फर्जी प्रविष्टियां कर ईंधन व मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाने तथा मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति और आयकर रिटर्न की जांच करने तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।फिलहाल संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि जांच के बाद बड़ी कार्रवाई संभव है।
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