छुईखदान।अंकित महोबिया - विकास खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय छुईखदान की कार्यप्रणाली पर इन दिनों गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लंबे समय से स्थायी बीईओ की नियुक्ति नहीं होने के कारण शिक्षा व्यवस्था अस्थायी नियंत्रण में चल रही है, जिसका असर अब स्कूलों तक साफ दिखाई देने लगा है। पूर्व बीईओ रमेंद्र डड़सेना के स्थानांतरण के बाद सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्यभार संभाला गया, लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था अब स्थायी रूप ले चुकी है। आरोप है कि शिक्षा सुधार के बजाय पसंदीदा कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का सिलसिला तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ कई सीएसी और शिक्षक अधिकारियों के करीबी होने के कारण कार्यालय में ही अटैच कर दिए गए हैं। उन्हें कमरा, टेबल और कंप्यूटर की सुविधा देकर वहीं बैठाया गया है। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ रहा है, जहां शिक्षक अनुपस्थित हैं। गेरूखदान में पदस्थ एक सहायक शिक्षक का मामला विशेष चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वह स्कूल में पढ़ाने के बजाय अधिकारी के निजी सहायक और ड्राइवर के रूप में कार्य कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि उसे शिक्षक सम्मान से भी नवाजा गया और हाल ही में नियमों को दरकिनार करते हुए नजदीकी स्कूल में पदस्थ करने की चर्चा भी सामने आई है, जबकि वर्तमान में संलग्नीकरण प्रक्रिया बंद है। हाल ही में विभिन्न समाचार पत्रों में सीएसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों की जांच में यह सामने आया कि कई सीएसी और शिक्षक स्कूलों के बजाय कार्यालय में सक्रिय हैं और वहीं से अन्य शिक्षकों के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। उदयपुर हायर सेकेंडरी स्कूल में भी हालात बेहतर नहीं हैं। यहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 और व्याख्याता लंबे समय से स्कूल से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं और डीईओ कार्यालय खैरागढ़ तक सीमित हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। जब शिक्षक कार्यालयों में जमे हैं और स्कूल खाली पड़े हैं, तो छात्रों की पढ़ाई कैसे होगी, यह बड़ा प्रश्न बन गया है।
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