खैरागढ़। वनांचल शिक्षा सेवा न्यास, छत्तीसगढ़ (रायपुर) द्वारा संचालित सरस्वती शिक्षा केंद्र के तत्वावधान में जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव के खैरागढ़, छुईखदान और डोंगरगढ़ संकुलों के नवीन एवं वरिष्ठ आचार्यों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खैरागढ़ में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में 46 महिला आचार्य और 9 पुरुष आचार्य सहित कुल 55 प्रतिभागियों ने भाग लेकर शिक्षा, संस्कार, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक दायित्वों से जुड़े विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर संघचालक श्री मोतीलाल यादव मुख्य अतिथि, जिला समन्वयक श्री श्रीराम यादव अध्यक्ष तथा श्री मनोहर लाल चंदेल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। श्री मोतीलाल यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण की चुनौती के बीच वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा का कार्य अत्यंत सराहनीय है और ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। वहीं मनोहर लाल चंदेल ने शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने तथा प्लास्टिक कचरे से इको-ब्रिक्स बनाने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रार्थना, शारीरिक गतिविधियां, खेलकूद, शिशु गीत, कहानी, बौद्धिक सत्र, आदर्श आचार्य की संकल्पना, उत्सव-पर्व, संस्कार शिक्षा और बालकों के सर्वांगीण विकास जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।रात्रि में आयोजित भारत माता आरती में भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्रीमती नीलिमा गोस्वामी, पार्षद श्रीमती रेखा गुप्ता, महिला मोर्चा मंडल महामंत्री श्रीमती गरिमा तिवारी, निक्कू श्रीवास एवं भूपेंद्र गंगबोइर सहित अनेक गणमान्यजन शामिल हुए। समापन समारोह में जिला आयुक्त स्काउट-गाइड एवं सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह मुख्य अतिथि, भाजपा जिला महामंत्री शशांक ताम्रकार अध्यक्ष तथा जिला समन्वयक श्री श्रीराम यादव मुख्य वक्ता रहे। श्री भागवत शरण सिंह ने कहा कि सरस्वती शिक्षा केंद्र के माध्यम से वनवासी क्षेत्रों के बच्चों को नि:शुल्क संस्कारयुक्त शिक्षा देना समाज के लिए अनुकरणीय कार्य है। वहीं श्री शशांक ताम्रकार ने कहा कि बदलते समय के साथ एआई (Artificial Intelligence) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी शिक्षा में किया जाना चाहिए। अपने संबोधन में श्रीराम यादव ने पंचकोष आधारित सर्वांगीण विकास अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोष की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण व्यक्ति को उसी प्रकार निखारता है जैसे मांजने पर कांसे का बर्तन अधिक चमकने लगता है। कार्यक्रम में पूर्व में उत्कृष्ट कार्य करने वाली आचार्याओं श्रीमती अंजना साहू, श्रीमती शालिनी सेन और श्रीमती लछंतीन कंवर का तिलक-वंदन कर मोमेंटो, श्रीफल और उपहार देकर सम्मान किया गया। साथ ही प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित कु. अम्बा यादव, श्रीमती अश्विनी वैष्णव और श्रीमती शोभा यादव का भी शाल, गणवेश और स्मृति-चिह्न भेंटकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के अंत में रोशन जंघेल ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्री खेमन वर्मा, श्री अनुज नेताम सहित तीनों संकुलों के आचार्य-आचार्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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