खैरागढ़ । जल जीवन मिशन के तहत किए गए निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित देरी के बीच खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड स्थित ग्राम बोराई के युवा ठेकेदार गणेश्वर जंघेल की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिजनों का आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में उनके 15 लाख रुपये से अधिक का भुगतान लंबे समय से लंबित था, जिसके कारण वे कर्ज और आर्थिक दबाव से जूझ रहे थे। इसी तनाव के बीच उन्होंने 17 जून को आत्मघाती कदम उठा लिया। परिजनों के अनुसार गणेश्वर जंघेल जीएनपी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के संचालक थे। उन्होंने दुर्ग जिले में जल जीवन मिशन के तहत पीएचई विभाग के कई निर्माण कार्य समय पर पूरे किए थे। परिवार का कहना है कि निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने परिचितों और निजी स्रोतों से उधार लेकर सामग्री खरीदी और मजदूरों का भुगतान किया। इसके बावजूद विभाग से भुगतान नहीं मिलने के कारण उन पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता गया। परिवार का आरोप है कि उधारदाताओं का बढ़ता दबाव और आर्थिक अनिश्चितता उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रही थी। उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान हो जाता, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक के साथ आक्रोश का माहौल है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, भुगतान में हुई कथित देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय करने तथा लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है। इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश कुमार गौतम ने बताया कि प्रकरण में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, क्षेत्र के कई ठेकेदारों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में भुगतान में देरी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। उनका मानना है कि यदि समय पर भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो छोटे और मध्यम ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट और गंभीर हो सकता है. गणेश्वर जंघेल की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी विकास कार्य समय पर पूरा करने वाले छोटे ठेकेदारों को यदि उनका वैध भुगतान समय पर नहीं मिलता, तो उसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी? अब पूरे मामले में पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और विभागीय जवाब का इंतजार है। समाचार लिखे जाने तक पीएचई विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
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