दुर्ग।सोन कुमार सिन्हा - जिले के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में वाहन फिटनेस, परमिट नवीनीकरण और अन्य जरूरी वाहन संबंधी कार्यों में हो रही देरी को लेकर आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कार्यालय पहुंचने वाले वाहन मालिकों और वाहन संचालकों का आरोप है कि कई आवश्यक कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति से लोगों में नाराजगी और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक, वाहन फिटनेस, परमिट नवीनीकरण, वाहन स्थानांतरण और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं में जरूरत से ज्यादा समय लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोग सुबह से कार्यालय पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार पूरा दिन बीत जाने के बाद भी उनका काम नहीं हो पाता। इससे वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
दलालों की सक्रियता पर सवाल
कार्यालय पहुंचे कई लोगों ने आरोप लगाया कि RTO परिसर के आसपास कथित दलालों और एजेंटों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि सामान्य प्रक्रिया से काम कराने पर लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि एजेंटों के माध्यम से कुछ कार्य जल्दी होने की बातें सामने आती हैं। इन आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्थायी कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में अस्थायी कर्मचारियों द्वारा भी कार्य संचालन किए जाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजस्व प्रभावित होने की आशंका
यदि शिकायतों में सच्चाई पाई जाती है और नियमों के अनुरूप कार्य नहीं हो रहे हैं, तो इसका असर शासन के राजस्व पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह मामला केवल प्रशासनिक अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासन की आय के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।
विभाग ने दी सफाई
वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कार्यालय की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित की जा रही है और सभी कार्य निर्धारित नियमों के तहत किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी प्रकार की शिकायत सामने आने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या RTO कार्यालय में लग रहे इन आरोपों की जांच होगी? क्या आम लोगों को दलालों के चंगुल से राहत मिलेगी? और क्या व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल वाहन मालिक बेहतर व्यवस्था और पारदर्शी कार्यप्रणाली की मांग कर रहे हैं।

