डोंगरगढ़।सोन कुमार सिन्हा - राजनांदगांव जिले में एक कैंसर पीड़ित महिला की दर्दभरी कहानी अब प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. न्याय की आस में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुकी पीड़िता अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है. पीड़ित महिला कीर्ति डकह ने आरोप लगाया है कि एक चिकित्सक द्वारा कथित गलत इलाज और दवाइयों की वजह से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आज वह कैंसर की दूसरी स्टेज जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं. महिला का कहना है कि इलाज कराने की उम्मीद लेकर वह चिकित्सक महेश तिवारी के पास पहुंची थीं लेकिन उपचार के दौरान दी गई दवाओं और सलाह ने उनकी जिंदगी को संकट में डाल दिया. महिला के मुताबिक शुरुआत में उन्हें भरोसा दिलाया गया कि स्वास्थ्य में सुधार होगा लेकिन हालत सुधरने के बजाय लगातार खराब होती चली गई. बाद में अन्य डॉक्टरों से जांच और परामर्श लेने पर बीमारी की गंभीर सच्चाई सामने आई. अब पीड़िता का आरोप है कि इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई जिसकी वजह से आज उन्हें जानलेवा बीमारी से लड़ना पड़ रहा है.
क्या इंसान की जिंदगी की कीमत सिर्फ 20 हजार?
इस मामले में जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा संबंधित चिकित्सक पर कथित तौर पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई है लेकिन पीड़िता इस कार्रवाई से बेहद नाराज और असंतुष्ट है.
कीर्ति डकह का कहना है कि अगर किसी की जिंदगी बर्बाद हो जाए किसी महिला को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझना पड़े तो क्या उसकी कीमत सिर्फ 20 हजार रुपये है. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल औपचारिकता नजर आती है न्याय नहीं.
कलेक्टर-SP तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिला न्याय
पीड़ित महिला ने बताया कि वह कई बार कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं. आवेदन पर आवेदन दिए गए लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला. महिला का आरोप है कि अब तक किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई. न्याय नहीं मिलने से परेशान महिला अब कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुकी हैं. उन्होंने साफ कहा है कि यदि प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो वह न्यायालय में याचिका दायर कर संबंधित चिकित्सक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी.
दो मासूम बच्चों का भविष्य भी दांव पर
इस पूरे मामले का सबसे भावुक पक्ष यह है कि कीर्ति डकह दो छोटे बच्चों की मां हैं. कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता लगातार सता रही है. महिला का कहना है कि बीमारी का दर्द अलग है लेकिन उससे भी बड़ा दर्द यह है कि उनके बच्चों का भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक पीड़ित महिला को न्याय के लिए कितने दरवाजे खटखटाने पड़ेंगे. क्या स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी. और क्या पीड़िता को वास्तव में न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

