खैरागढ़ ! राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी लेटर के सहारे सरकारी नौकरी करने वाले जिले मे चार कर्मचारियो को जॉच परीक्षण बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने पहले बर्खास्त किया और अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। जानकारी अनुसार 2021 मे टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद जिले के अलग अलग शालाओ मे सहायक गेड 3 के पद पर कार्य कर रहे थे जबकि डोलामणी मटारी, सादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा, अमीन शेख मोहला मानुपर जिले के अगल अलग शालाओ मे काम कर रहे थे। राज्य शिक्षा आयोग के सचिव डॉ ओपी मिश्रा के आदेश पर डाटा एंट्री आपरेटर के पद पर तीन और पांच सहायक ग्रेड तीन के पद पर सितंबर 2021 से काम कर रहे है। दोनो जिलो मे शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी मई 22 के आदेश के परिपालन मे उन्हे ज्वाइंनिंग दी गई है। संबंध मे डीईओ कार्यालय से राज्य शिक्षा आयोग द्वारा जारी आदेश की सत्यता को लेकर जानकारी लेने पर पता चला कि उक्त क्रमांक का पत्र विभाग ने बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया है। पत्र के साथ साथ आयोग के सचिव डॉ ओपी मिश्रा का भी हस्ताक्षर उपलब्ध दस्तावेजो से मेल नही खा रहा। मामले मे शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन और आयोग द्वारा जारी आदेश पत्र को फर्जी पाए जाने पर डीईओ लालजी द्विवेदी ने अपने जिले मे काम करने वाले चारो कर्मचारियो को छग सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 10-9 के तहत सेवा से पहले बर्खास्त किया उसके बाद आज थाने मे एफआईआर दर्ज कराया है। डीईओ लालजी द्विवेदी के शिकायत आवेदन पर पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी का अपराध घटित पाए जाने पर अपराध पंजीबद्ध किया है। है।
हाई और हायर मे मिली थी पदस्थापना
आयोग द्वारा सितंबर 21 मे जारी पत्र के आधार पर जिले मे शिक्षा विभाग द्वारा मई 22 मे टीकमचंद साहू को हाईस्कूल मोहगॉव, फगेंद्र सिंहा को उमा शाला बकरकट्टा, रजिया अहमद को उमा शाला पैलीमेटा मे सहायक गेड तीन के रूप मे और अजहर अहमद डाटा एंट्री आपरेटर को छुईखदान बीईओ मे पदस्थापना आदेश जारी किया गया था हालाकि इन चारो के अलावा सुश्री सीएच एंथोनी को भी ठाकुरटोला उमा शाला मे सहायक ग्रेड 3 के रूप मे पदस्थापना आदेश जारी किया गया था लेकिन उसने अपनी उपस्थिति ही नही दी जिसके चलते पांच मे से चार को पहले विभाग ने बर्खास्त किया फिर एफआईआर कराया है।
कुछ दिन कलेक्टोरेट मे भी किया काम
जिला गठन बाद रजिया अहमद को कलेटोरेट के डीएमएफ शाखा मे अजहर अहमद को अभियोजन शाखा मे संलग्र किया गया था वही फगेंद्र सिंहा और टीमक सिंहा से डीईओ आफिस मे काम लिया जा रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद से ही चारो कर्मचारी अलग अलग कारण बताकर अवकाश पर चले गए थे तत्संबंध मे कार्यालय द्वारा प्रतिरक्षा को लेकर दिया जवाब संतुष्टिजनक और दस्तावेज प्रमाणित नही पाया गया जिसके चलते उनकी नियुक्ति को वाजिब ठहराया जा सके। आखिरकार विभाग ने अगस्त मे हुए खुलासे पर जॉच परीक्षण सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश के सहारे सालो से नौकरी करने वालो के खिलाफ एफआईआर कराया है।

