खैरागढ़। दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा हटाए जाने की घटना को लेकर गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संतोष मरावी ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अनशन कर रहे थे। उनका आरोप है कि 18 जुलाई 2026 की सुबह दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें मंच से हटाया। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। संगठन का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ अन्याय नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर मामला है। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है। संगठन ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संविधानसम्मत एवं लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी जनआंदोलन किया जाएगा।
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