डोंगरगढ़ -सोन कुमार सिन्हा - छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को गो-वंश संरक्षण, गौशालाओं की व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से गूंजा। पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने प्रदेश में संचालित योजनाओं, वित्तीय प्रावधानों और जमीनी क्रियान्वयन की स्थिति पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। विधायक बोहरा ने प्रश्न उठाया कि राज्य में पंजीकृत एवं अपंजीकृत गौशालाओं की वर्तमान संख्या क्या है, उनके संचालन हेतु कितनी राशि आबंटित की गई है तथा गो-वंश के लिए चारा, पानी, शेड, पशु-चिकित्सा और नियमित टीकाकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही हैं। साथ ही सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गो-वंश की पहचान और संरक्षण के लिए लागू कार्ययोजना पर भी जवाब मांगा।
राज्य में 189 गौशालाएं संचालित
आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने लिखित उत्तर में बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 135 पंजीकृत एवं 54 अपंजीकृत, कुल 189 गौशालाएं संचालित हैं। वर्ष 2024-25 में 135 पंजीकृत गौशालाओं को उनकी मांग अनुसार 1922 लाख रुपये अनुदान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त आदर्श गौधाम एवं गोकुल ग्राम झालम (जिला बेमेतरा) को 29.75 लाख रुपये की राशि प्रदाय की गई है। सरकार द्वारा गो-वंश संवर्धन हेतु पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान योजना, शत-प्रतिशत अनुदान पर सांड वितरण योजना तथा उन्नत मादा वत्सपालन योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2024-25 में इन योजनाओं के लिए क्रमशः 3 करोड़ 35 लाख 85 हजार रुपये, 80.50 लाख रुपये तथा 249.90 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।मंत्री ने बताया कि गौशालाओं को पोषण आहार, शेड निर्माण, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए नियमानुसार अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति संस्था प्रतिवर्ष दिए जाने का प्रावधान है। निराश्रित गो-वंश की पहचान हेतु पशुओं में रेडियम पट्टी लगाने तथा गौधाम योजना के माध्यम से संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता
विधायक बोहरा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित एवं प्रायोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संख्या, व्यय राशि और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता का प्रतिशत भी पूछा। पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में विभाग द्वारा 2662 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिलों द्वारा 52 कार्यक्रम तथा अशासकीय संस्थाओं द्वारा 504 सांस्कृतिक आयोजन प्रायोजित किए गए। इन पर क्रमशः 14 करोड़ 76 लाख 50 हजार 2 रुपये, 3 करोड़ 78 लाख 29 हजार रुपये एवं 9 करोड़ 87 लाख 59 हजार रुपये व्यय किए गए। उन्होंने बताया कि विभागीय कार्यक्रमों में चिन्हारी पंजीकृत कलाकारों को स्वीकृति दी जाती है, जिनमें 100 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों की सहभागिता सुनिश्चित रहती है। वहीं जिला प्रशासन एवं अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों में कुल राशि का 45 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों के पारिश्रमिक हेतु स्वीकृत किया जाता है। विधानसभा में उठाए गए इन सवालों ने एक ओर जहां गो-वंश संरक्षण की जमीनी स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया, वहीं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कलाकारों के सशक्तिकरण के मुद्दे को भी केंद्र में ला दिया।


