राजनांदगांव।सोन कुमार सिन्हा - जिले में पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान के चलते जहां आम लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं छोटे-छोटे बच्चे अब भी आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचने को मजबूर हैं। ऐसे हालात में उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति को लेकर अभिभावकों ने चिंता जताते हुए प्रशासन से त्वरित निर्णय लेने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, जिले में स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है, जिससे स्कूली बच्चों को गर्मी से राहत मिल रही है। लेकिन इसके विपरीत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन अभी भी नियमित रूप से जारी है। तेज धूप और लू के बीच 3 से 6 वर्ष तक के मासूम बच्चों का केंद्र तक पहुंचना न केवल कठिन है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमपूर्ण साबित हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि इतनी कम उम्र के बच्चों की सहनशक्ति कम होती है। तेज गर्मी के कारण बच्चों में सिरदर्द, उल्टी, चक्कर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसके बावजूद केंद्रों का संचालन जारी रहना चिंताजनक है। गैर-सरकारी संस्था छत्तीसगढ़ सेवा कल्याण परिषद की अध्यक्ष संगीता जैन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिस प्रकार स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है, उसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में भी तत्काल अवकाश लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए। समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे शासन के निर्देशानुसार केंद्रों का संचालन कर रही हैं, लेकिन भीषण गर्मी में बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है और उन्हें संभालना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार बच्चे असहज महसूस करते हैं, जिससे कार्य में कठिनाई आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में छोटे बच्चों को लू और तेज धूप से बचाना बेहद जरूरी है। उन्हें पर्याप्त पानी, हल्का भोजन और ठंडे वातावरण में रखना चाहिए। लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय ले। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश लागू कर बच्चों को राहत दी जाए, ताकि वे भीषण गर्मी के प्रकोप से सुरक्षित रह सकें। फिलहाल अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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