राजनांदगांव | नशे की गिरफ़्त में आ रहे बच्चों को बचाने और उनके पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन अब सख्त कदम उठाने जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर कोटपा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि नशे की चपेट में आ चुके बच्चों के लिए पुनर्वास जरूरी है और उन्हें मुख्यधारा में लाने की पूरी कोशिश की जाए।
कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, आबकारी, शिक्षा और नगरीय निकाय विभागों को मिलकर कार्रवाई करने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों के आसपास नशे के सौदागरों पर नजर रखी जाए और कोटपा अधिनियम के तहत बिना किसी ढिलाई के कार्रवाई हो।
8 से 22 अप्रैल तक चलने वाले पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत इस बार बच्चों के सुपोषण को लेकर विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। बैठक में "जीवन के प्रथम 1000 दिवस" की अहमियत पर चर्चा हुई। गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार की जानकारी दी जाएगी और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण भी, पढ़ाई भी थीम के तहत गतिविधियां चलेंगी।
पोषण पखवाड़ा के दौरान साइकिल और बाइक रैलियां, पोषण रथ और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। "हमर स्वस्थ लईका" और "एनिमिया जागरूकता" जैसे अभियानों के तहत शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें बच्चों को कुपोषण और मोटापे से बचाव की जानकारी दी जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने के लिए सामाजिक जागरूकता बेहद जरूरी है। बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बच्चों के पोषण के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।
इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुरूचि सिंह, वनमंडलाधिकारी आयुष जैन, नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम खेमलाल वर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि पोषण ट्रैकर से आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी की जा रही है और सभी गतिविधियों का पालन कैलेंडर के अनुसार होगा।

