बलौदा बाजार | प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और किसान विरोधी रवैये का एक और मामला सामने आया है। जिले के सुहेला तहसील में तहसीलदार कुणाल सेवईया की धमकियों और दुर्व्यवहार से तंग आकर एक किसान ने 12 मार्च को तहसील परिसर में ही ज़हर सेवन कर लिया। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तहसीलदार को निलंबित कर बस्तर अटैच कर दिया, लेकिन क्या सिर्फ निलंबन से किसानों को न्याय मिल जाएगा?
प्रशासन की देरी ने बढ़ाया किसान का दर्द
मिली जानकारी के अनुसार, किसान लंबे समय से अपनी जमीन से जुड़े किसी मामले में तहसीलदार के पास न्याय की उम्मीद लेकर पहुंच रहा था, लेकिन उसे न्याय की जगह अपमान और धमकियां मिलीं। लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रहे किसान ने आखिरकार तहसील कार्यालय में ही ज़हर सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उसे रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
किसान संगठनों ने उठाए कड़े सवाल
इस घटना के बाद किसान संगठनों में भारी आक्रोश है। किसान संघर्ष समिति और अन्य संगठनों ने प्रशासन से सवाल किया कि—
क्या तहसीलदार के निलंबन भर से न्याय मिल जाएगा? किसान को इस मानसिक प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी? किसानों के प्रति इस तरह के व्यवहार पर प्रशासनिक जवाबदेही कब तय होगी?
प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?
किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता बताया है। उनका कहना है कि अगर पहले ही तहसीलदार के खिलाफ शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो किसान को अपनी जान देने की कोशिश न करनी पड़ती।
मामला यहीं खत्म नहीं—सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले में किसान संगठनों ने आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक बुलाई है। उनका कहना है कि तहसीलदार की गिरफ्तारी होनी चाहिए और किसान के परिवार को न्यायिक मुआवजा दिया जाना चाहिए। प्रशासन को यह समझना होगा कि किसानों की आत्मसम्मान और आजीविका से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

